श्रीनिवास रामानुजन
श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के ईरोड गांव में हुआ था। रामानुजन के पिता साड़ी की दुकान पर एक क्लर्क थे और उनकी मां हाउस वाइफ थी। 1889 में चेचक की गिरफ्त में आने से उनके सभी भाई बहनों की मृत्यु हो गई थी, लेकिन रामानुजन ठीक हो गए थे। आपको बता दें रामानुजन पैदा होने के बाद करीब तीन साल तक बोले नहीं थे, घरवाले इन्हें गूंगा समझते थे।आपको शायद ही पता होगा कि घर का खर्च निकालने के लिए रामानुजन ट्यूशन पढ़ाते थे। वह 7वीं कक्षा में बी.ए के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे। 13 साल की उम्र में उन्होंने एडवांस ट्रिग्नोमेट्री को रट लिया था और खुद की थियोरम बनाना शुरू कर दिया था।
  दुनिया के सबसे महान गणितज्ञ
ब्रिटेन के प्रोफेसर हार्डी रामानुजन को दुनिया का सबसे महान गणितज्ञ मानते थे। कहा जाता है कि उन्होंने दुनिया के प्रतिभावान व्यक्तियों को 100 नंबर पर आंका था और इस लिस्ट में खुद को सौ में से तीस नंबर दिए थे, लेकिन रामानुजन को 100 में से 100 नंबर दिए थे। हार्डी ने साल 1913 में उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि साल 1919 में हेपेटिक अमीबासिस ने रामानुजन को भारत लौटने के लिए मजबूर किया।

भारत लौटने के बाद वह टीबी जैसी भयावह बीमारी से ग्रस्त हो गए और 26 अप्रैल 1920 में मात्र 32 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। रामानुजन साहब को वो सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।
रामानुजन के सम्मान में शुरू हुआ यह पुरस्कार
श्रीनिवास रामानुजन के सम्मान में साल 2005 से रामानुजन पुरस्कार की शुरूआत हुई, इसे इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरिटिकल फिजिक्स रामानुजन पुरस्कार भी कहा जाता है। रामानुजन पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। यह हर साल विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों को दिया जाता है, उनकी उम्र 45 वर्ष से कम होनी चाहिए। तथा यह इटली में स्थित सैद्धांतिक भौतिक केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।